पालीताना (शत्रुंजय महातीर्थ) की यात्रा जैन धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती है। इस यात्रा के दौरान 5 प्रमुख चैत्यवंदन (Five Chaityavandans) करने का विधान है, जो तीर्थ की पूर्णता और आत्मिक शुद्धि के लिए आवश्यक हैं।
नीचे पालीताना के इन 5 चैत्यवंदनों का विवरण हिंदी अर्थ और विधि के साथ दिया गया है:
1. जय तलेटी चैत्यवंदन (First Chaityavandan of Jay Taleti)
यह वंदन शत्रुंजय पर्वत की तलहटी में स्थित "जय तलेटी" शिला पर किया जाता है। भक्त पर्वत पर चढ़ने से पहले इस पवित्र स्थान को नमन करते हैं।
भाव: "श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र, दीठे दुर्गति वारे" — इस क्षेत्र के दर्शन मात्र से ही दुर्गति का नाश होता है।
विधि: यहाँ खमासमण, इरियावहिया, और लोगस्स सूत्रों का पाठ किया जाता है।
2. श्री शांतिनाथ भगवान चैत्यवंदन (Second Chaityavandan of Shree Shantinath)
शत्रुंजय के चढ़ाव के मार्ग में श्री शांतिनाथ भगवान के मंदिर में यह दूसरा वंदन होता है।
विषय: शांतिनाथ भगवान 16वें तीर्थंकर हैं। उन्हें "मृग लांछन" और "कंचन वर्णी काया" वाला बताया गया है।
विशेष: यह वंदन मन की शांति और भक्ति भाव को बढ़ाने के लिए किया जाता है।
3. रायण पगला चैत्यवंदन (Third Chaityavandan of Rayan Pagla)
यह वंदन मुख्य मंदिर के पास स्थित "रायण वृक्ष" (खीरनी का पेड़) के नीचे स्थित भगवान आदिनाथ के प्राचीन चरण पादुकाओं (पगला) पर किया जाता है।
महत्व: माना जाता है कि भगवान आदिनाथ इसी वृक्ष के नीचे ध्यानमग्न हुए थे।
दोहा: "एह गिरि ऊपर आदिदेव, प्रभु प्रतिमा वंदो; रायण हेठे पादुका, पूजीने आनंदो"।
4. श्री पुंडरीक स्वामी चैत्यवंदन (Fourth Chaityvandan of Shree Pundarik Swami)
भगवान आदिनाथ के प्रथम गणधर पुंडरीक स्वामी ने इसी पर्वत पर निर्वाण प्राप्त किया था। उनके सम्मान में यह चौथा वंदन मुख्य मंदिर के सामने वाले छोटे मंदिर में किया जाता है।
इतिहास: पुंडरीक स्वामी और उनके 5 करोड़ मुनियों ने यहाँ मोक्ष प्राप्त किया था, जिसके कारण इस पर्वत का नाम "पुंडरीकगिरि" पड़ा।
5. मुख्य आदिनाथ भगवान चैत्यवंदन (Fifth Chaityavandan of Lord Adinath)
यह अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण वंदन मुख्य गंभारे (गर्भग्रह) में भगवान आदिनाथ (दादा) की विशाल प्रतिमा के सम्मुख किया जाता है।
स्तुति: "आदि जिनवर राया, जस सोवन काया" — यहाँ भक्त भगवान के 108 शुभ लक्षणों और उनके भव्य रूप की स्तुति करते हैं।
प्रार्थना: इस वंदन के साथ यात्रा की पूर्णता होती है और भक्त मोक्ष प्राप्ति की कामना करते हैं。 palitana 5 chaityavandan in hindi full
चैत्यवंदन की सामान्य विधि:
Shree Shantrunjay giriraj Yatra Five Chaityavandans - jainsite
In the sacred pilgrimage of Palitana (Shatrunjaya Giriraj), performing the 5 Chaityavandans is a vital spiritual ritual. These specific prayers are offered at significant points during the ascent of the holy hill to honor the Tirthankars and the sanctity of the site.
Below is a report detailing the 5 Chaityavandans in Hindi with their spiritual significance.
पालिताना के 5 चैत्यवंदन (Palitana 5 Chaityavandan)
1. प्रथम चैत्यवंदन: जय तलेटी (Jay Taleti)
तलेटी (पहाड़ की तलहटी) पर यात्रा शुरू करते समय यह वंदन किया जाता है। यह शत्रुंजय तीर्थ की महिमा को समर्पित है.
हिंदी पाठ (Hindi Lyrics):"श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र, दीठे दुर्गति वारे;भाव धरीने जे चढे, तेने भवपार उतारे।अनंत सिद्धनो आहे ठाम, सकल तीर्थनो राय;पूर्व नवानु ऋषभदेव, ज्यां थव्या प्रभु पाय।"
2. द्वितीय चैत्यवंदन: श्री शांतिनाथ भगवान (Shree Shantinath Bhagwan)
यात्रा के दौरान 16वें तीर्थंकर श्री शांतिनाथ भगवान के चरणों में यह भक्ति अर्पित की जाती है.
हिंदी पाठ (Hindi Lyrics):"शांति जिनेश्वर सोलमा, अचिरा सुत वंदो;विश्वसेन कुल नभोमणि, भविजन सुख कंदो।मृग लंछन जिन आउखु, लाख वरस प्रमाण;हत्थीणापुर नयरी धणी, प्रभुजी गुण मणि खाण।"
3. तृतीय चैत्यवंदन: रायण पगला (Rayan Pagla)
यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है क्योंकि यहाँ आदिनाथ भगवान के प्राचीन पदचिह्न (Paduka) हैं.
हिंदी पाठ (Hindi Lyrics):"एह गिरि ऊपर आदिदेव, प्रभु प्रतिमा वंदो;रायण हेठे पादुका, पूजीने आनंदो।एह गिरिनी महिमा अनंत, कुण करे वखाण;चैत्री पूनमने दिने, तेह अधिको जाण।"
4. चतुर्थ चैत्यवंदन: पुंडरीक स्वामी (Pundarik Swami)
पुंडरीक स्वामी आदिनाथ भगवान के प्रथम गणधर थे, जिन्होंने इसी पर्वत से मोक्ष प्राप्त किया था.
संक्षिप्त सार: इस वंदन में पुंडरीक स्वामी की आराधना की जाती है जिन्होंने करोड़ों मुनियों के साथ यहाँ से मुक्ति प्राप्त की थी.
5. पंचम चैत्यवंदन: श्री आदिनाथ भगवान (Shree Adinath Dada) Shree Siddhagiriraj Yatra Five Chaityavandans - Tattva Gyan
The Palitana 5 Chaityavandan is a central ritual for pilgrims performing the Shatrunjaya Giriraj Yatra. Each of the five Chaityavandans is performed at a specific sacred spot during the ascent to the summit. 1. First Chaityavandan: Jay Taleti (जय तलेटी)
Performed at the base of the hill to honor the entire sacred mountain. Hindi Text Excerpt: दूसरी में कृतज्ञ बनो
"श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र, दीठे दुर्गति वारे;भाव धरी ने जे चढे, तेने भव पार उतारे।"
Significance: It marks the beginning of the spiritual journey, acknowledging the countless souls who attained liberation on this hill.
2. Second Chaityavandan: Shree Shantinath (श्री शांतिनाथ) Dedicated to the 16th Tirthankara, Lord Shantinath. Hindi Text Excerpt:
"शांति जिनेश्वर सुमिरिये, जेनी अचिरा माय,विश्वसेन कुल उपन्यो, मृग लांछन पाय।"
Significance: Devotees pray for inner peace and the removal of worldly obstacles.
3. Third Chaityavandan: Rayan Pagla (रायरण पगला)
Performed at the sacred Rayan tree where the first Tirthankara, Lord Adinath, used to sit in meditation. Hindi Text Excerpt:
"श्री शत्रुंजय आदिजिन आविया, पूर्व नवाणु वारजी,अनंत लाभ इहाँ जिनवर जाणी, समोसर्या निर्धारजी।"
Significance: Commemorates the 99 visits of Lord Adinath to this holy site.
4. Fourth Chaityavandan: Shree Pundarik Swami (श्री पुंडरीक स्वामी)
Dedicated to the chief disciple and grandson of Lord Adinath, who achieved salvation here. Hindi Text Excerpt:
"एक दिन पुंडरीक गणधरु रे लाल, पूछे श्री आदि जिणंद सुखकारी रे;कहिये ते भवजल उतरी रे लाल, पामीश परमानंद भव वारी रे।"
Significance: Highlights the path to liberation shown by the first Ganadhara.
5. Fifth Chaityavandan: Lord Adinath (श्री आदिनाथ भगवान)
Performed at the main temple at the summit dedicated to the Moolnayak (primary deity). Hindi Text Excerpt:
"माता मरुदेवीना नंद, देखी तारी मूर्ति मारुं मन लोभाणुजी;मारुं दिल लोभाणुजी... करुणा नगर करुणा सागर, काया कंचनवान।"
Significance: The final devotional act of the yatra, celebrating the glory of Lord Rishabhdev (Adinath). Pilgrimage Logistics
The climb involves approximately 3,500 to 3,750 steps to reach the summit, which houses over 800 marble-carved temples. Most pilgrims start very early (around 6:00 AM) to avoid the heat. Expand map Shree Siddhagiriraj Yatra Five Chaityavandans - Tattva Gyan
The Siddhagiri Palitana 5 Chaityavandans are a series of five prayers recited during the Palitana pilgrimage (Yatra). Below are the full lyrics in Hindi for each of the five stages of the ritual.
1. जय तलेटी (Jay Taleti) - पहली चैत्यवंदन प्रभु प्रतिमा वंदो
श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र, दीठे दुर्गति वारे;भाव धरी ने जे चढे, तेने भव पार उतारे।अनंत सिद्धनो आहे ठाम, सकल तीर्थनो राय;पूर्व नवाणु ऋषभदेव, ज्यां ठाविया प्रभु पाय।
सूरजकुंड सोहामणों, कावड यक्ष अभिराम;पांडव पांचे ज्यां गया, तेहने करूँ प्रणाम।जे नर ए गिरि चढे, निर्मल मन करी जोय;ते नर शिव सुख पामशे, फेर न भव-भव होय।
2. शांतिनाथ भगवान (Shanthi Nath Bhagwan) - दूसरी चैत्यवंदन
शांति जिनेश्वर साहिबो, शांति करण सुखकार;विश्वसेन कुल नंदन, अचिरा माँ मल्हार।हस्तिनापुरनो धणी, गजपुरनो अवतार;कामित पूरण सुरतरु, वंदूँ वारंवार।
अच्युत कल्पथी आविया, सोलम तीर्थंकर देव;शांति सुधा रस पीववा, सुरनर साधे सेव।भावे जे नर पूजशे, धरी मनमां सद्भाव;तेहने सुख संपत्ति मिले, कटे सकल भव भाव।
3. पुंडरीक स्वामी (Pundarik Swami) - तीसरी चैत्यवंदन
ऋषभ जिनेश्वर पादपद्म, भ्रमर समान विनीत;पुंडरीक स्वामी वंदिए, धरी परम प्रीत।विमलगीरीनां शिखर पर, प्रथम गणधर राय;अनंत साधु साथे गया, शिवपुर पदनी पाय।
चैत्र सुदी पूनम दिने, पाल्या उत्तम भाव;कर्म तणा बंधन तजी, लीधो मोक्ष प्रभाव।तेहना चरणनी रज थकी, पावन थाय शरीर;पुंडरीक नामे पामिए, भवसागरनो तीर।
4. आदिनाथ भगवान (Adinath Bhagwan) - चौथी चैत्यवंदन
मरुदेवी कुल नंदन, नाभिराज कुमर;प्रथम जिनेश्वर ऋषभदेव, शिव सुखना सागर।अयोद्धा नगरी जनमिया, विनतापुर अवतार;चोरासी पूर्व आयुष्य, प्रगट्यो मोक्ष द्वार।
विमलगीरीना शिखर पर, नवाणु वार आविया;अनंत कालनां दुःखडां, प्रभु तमे तो काविया।जे नर भावे वंदशे, ऋषभदेवना पाय;तेहने ऋद्धि-सिद्धि वरे, सकल कष्ट मिट जाय।
5. रायण वृक्ष (Rayan Vruksh) - पांचवीं चैत्यवंदन
शीतल छाया रायण तणी, परम शांतिनो वास;जिहां बेसी प्रभु ध्यान धरे, प्रकटे दिव्य प्रकाश।प्रथम जिनेश्वर ऋषभदेव, पादपद्म ज्यां स्थाप्या;नवाणु वारना फेरमां, प्रभुये दर्शन आप्या।
सिद्धगिरीनो ए महिमा, रायण वृक्ष विशेष;पाप तणां पुंज प्रजले, न रहे दुःखनो लेश।भाव धरीने जे वंदे, मनमां धरी आनंद;ते नर पामे शाश्वत, सुख संपत्तिनो कंद। यत्रा विधि (Quick Reference)
The Tattva Gyan Guide outlines the sequence for this pilgrimage ritual. Generally, pilgrims perform these at the following spots: Jay Taleti (The base of the hill) Shanti Nath Bhagwan Temple Pundarik Swami Footprints (Paduka) Adinath Bhagwan Main Temple Rayan Vruksh (The sacred tree behind the main temple)
यहाँ पर पालीताना के पाँच चैत्यवंदन का पूरा पाठ हिंदी में प्रस्तुत है। ये सभी जैन धर्म में प्रसिद्ध और नियमित रूप से बोले जाने वाले चैत्यवंदन हैं।
जो साधक पालिताना में 5 चैत्यवंदन को पूर्ण विधि-विधान से करता है, वह निर्जरा (कर्मों का क्षय) तथा मोक्ष का अधिकारी बनता है।
एक बार एक बूढ़े जैन मुनि अपने शिष्य को लेकर पालीताना पहुँचे। शिष्य ने पूछा- "गुरुदेव! 3500 सीढ़ियाँ चढ़ना मुश्किल है। कोई आसान उपाय बताएँ?"
मुनि ने कहा- "बेटा, पाँच चैत्यवंदन ही आसान उपाय है। हर 100 सीढ़ी पर एक वंदन सोचो। पहली में अहंकार छोड़ो, दूसरी में कृतज्ञ बनो, तीसरी में सबको समान देखो, चौथी में दूसरों के लिए प्रार्थना करो, और पाँचवीं में अपने को भगवान में विलीन कर दो।"
शिष्य ने वैसा ही किया। जब वह ऊपर पहुँचा, तो उसे सीढ़ियों का अहसास ही नहीं हुआ। उसने पाया कि पाँच चैत्यवंदन केवल मंत्र नहीं, बल्कि एक योग यात्रा है।
चैत्यवंदन का अर्थ है 'जिनालय (मंदिर) में स्थित जिनेन्द्र देव की वंदना करना'। यह एक विशेष पूजन विधि है, जिसमें अर्हंत (तीर्थंकर) और सिद्ध भगवान की स्तुति की जाती है।
पालीताना में 5 चैत्यवंदन क्यों? पालीताना में करोड़ों मुनियों, चौरासी लाख तपस्वियों तथा अनेकों तीर्थंकरों के क्षेत्र में स्थित प्रत्येक जिनालय की आराधना के लिए यह क्रम बनाया गया है। पाँच चैत्यवंदन पाँच विशेष भावनाओं या पाँच प्रकार के तीर्थंकरों के प्रति समर्पित है।